सोमवार, 2 मई 2011

बस्तर की बाजी


बस्तर प्रदेश की सांस्कृतिक राजधानी के तौर पर जाना जाता है... यहां का दशहरा देश ही नहीं विदेशों में भी विख्यात है... लेकिन नक्सली हिंसा की वजह से बस्तर अपनी रंगत खोता जा रहा है... सांसद बलीराम कश्यप के निधन के बाद बस्तर एक बार फिर लोकसभा उपचुनाव को लेकर सुर्खियों में है... बस्तर लोकसभा में चार जिले बीजापुर, नारायणपुर, दंतेवाड़ा और बस्तर आते हैं... जिनमें आठ विधानसभा कोंटा, बीजापुर, दंतेवाड़ा, जगदलपुर, बस्तर, चित्रकूट, नारायणपुर और कोंटागांव के मतदाता मतदान करते हैं.. ये पूरे इलाके धुर नक्सली माने जाते हैं... सबसे खास बात ये कि इन आठ विधानसभा में से सात सीटों पर भाजपा का कब्जा है... वहीं एक सीट कोंटा से कांग्रेस के प्रत्याशी कवासी लखमा ने जीत हासिल की थी...बस्तर लोकसभा के लिए हो रहे उपचुनाव में मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच ही माना जा रहा है... भाजपा ने जहां बस्तर में सहानुभुती वोट बटोरने के लिए बलीराम कश्यप के बेटे दिनेश कश्यप पर भरोसा जताया है... दिनेश कश्यप वर्तमान में केंद्रीय सहकारी बैंक के अध्यक्ष हैं... और उनके छोटे भाई केदार कश्यप रमन सरकार में मंत्री हैं... वहीं प्रदेश कांग्रेस की गुटबाजी में इस बार जोगी खेमा बाजी मार ले गया... और विधायक कवासी लखमा पर कांग्रेस ने दाव लगाया है.... कवासी लखमा कोंटा विधानसभा क्षेत्र का तीन बार प्रतिनिधित्व कर चुके हैं... और वर्तमान में वे वहां से विधायक हैं... आम चुनाव की बात करें तो साल 1998 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी मानकूराम सोढ़ी को हराकर बलीराम कश्यप पहली बार सांसद बने.. उन्होंने साल 1999 और 2004 में कांग्रेस प्रत्याशी महेंद्र कर्मा को मात दी...जिसके बाद साल 2009 के आम चुनाव में भी भाजपा ने बस्तर टाइगर बलीराम कश्यप पर ही भरोसा जताया... और उन्होंने कांग्रेस के उम्मीदवार शंकर सोढ़ी और भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी के मनीष कुंजाम को हराकर जीत हासिल की... इस लिहाज से भाजपा ने बलीराम कश्यप के बेटे दिनेश कश्यप को लोकसभा उपचुनाव में उम्मीदवार बनाकर साबित कर दिया...कि वो बस्तर में किसी तरह का रिस्क नहीं लेना चाहती...

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