मंगलवार, 28 जुलाई 2009
'मौत का सौदागर'
‘मौत का सौदागर’
जी हां इस वाक्य को सुनकर में हैरान रह गया था... जब कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी ने गुजरात दंगों को लेकर मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को इस उपाधि से नवाजा था.... लेकिन अब शायद नरेंद्र मोदी की बारी थी... तभी तो उन्होंने पटना में आयोजित भाजपा की स्वाभिमान रैली में एक तीर से कई निशाने साधे... और मैडम सोनिया से पूछ ही डाला की भोपाल गैस त्रासदी में मारे गए हजारों लोगों की मौत का जिम्मेदार कौन है.... और किस तरह से इतनी मौत का दोषी वॉरेन एंडरसन को सरकारी दामाद बनाकर बचाया गया.... तो आखिर कौन हुआ ‘मौत का सौदागर’
भले ही नेता वोट के लिए आरोप – प्रत्यारोप की राजनीति करे.... लेकिन एक बात तो साफ है कि चाहे वो गोधरा कांड हो.... या फिर भोपाल गैस त्रासदी.... दोनों ही जगह निर्दोष लोग ही काल के गाल में समाए.... और वे निर्दोष लोग ही सालों बाद भी मुंह बांए खड़े हैं कि हमारे अपनों की मौत का जिम्मेदार आखिर कौन है.... इस सवाल पर लाख दलीलों और गवाहों के बयान के बावजूद शायद हमारी न्याय व्यवस्था भी मौन है....
लेकिन एक बात तो साफ है कि जिस तरह से ‘मौत का सौदागर’ शब्द भारत की राजनीति में चल पड़ा है.... अब ये शोध का विषय हो सकता है.... कि आखिर हमारे देश में कौन-कौन लोग ऐसे हैं जिन्हें इस उपाधी से नवाजा जा सकता है.... और जो वाकई में ‘मौत के सौदागर’ हैं.... इस शब्द को भारतीय राजनीति में लाने का श्रेय भी कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी को जाता है.... कि उन्होंने इस शब्द का मतलब जाने बिना ही... एक चुनावी सभा में नरेंद्र मोदी को मौत का सौदागर कह डाला... या फिर उनका भाषण लिखने वाला वो शख्स जिसने बड़े ही उम्दा तरीके से सोनिया जी के भाषण में इस शब्द का प्रयोग किया... बहरहाल अक्सर यही होता है कि करता कोई है, नाम किसी और का होता है...
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