मंगलवार, 28 जुलाई 2009

कोई दिवाना कहता है

कोई दिवाना कहता है कोई पागल समझता है
मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है
तू मुझसे दूर कैसी है मैं तुझसे दूर कैसा हूं
ये तेरा दिल समझता है या मेरा दिल समझता है
मोहब्बत एक अहसासों की पावन सी कहानी है
कभी कबीरा दिवाना था कभी मीरा दिवानी थी
यहां सब लोग कहते हैं मेरी आंखों में आसूं हैं
जो तू समझे तो मोती हैं जो ना समझे तो पानी हैं
समन्दर पीर का अन्दर है लेकिन रो नहीं सकता
ये आंसू प्यार का मोती है इसको खो नहीं सकता
मेरी चाहत को दुल्हन तू बना लेना मगर सुन ले
जो मेरा हो नहीं पाया वो तेरा हो नहीं सकता
भ्रमर कोई कुमुदनी पर मचल बैठा तो हंगामा
हमारे दिल में कोई ख्वाब पल बैठा तो हंगामा
अभी तक डूब कर सुनते थे सब किस्सा मोहब्बत का
मैं किस्से को हकीक़त में बदल बैठा तो हंगामा
डॉ कुमार विश्वास

'मौत का सौदागर'


मौत का सौदागर

जी हां इस वाक्य को सुनकर में हैरान रह गया था... जब कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी ने गुजरात दंगों को लेकर मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को इस उपाधि से नवाजा था.... लेकिन अब शायद नरेंद्र मोदी की बारी थी... तभी तो उन्होंने पटना में आयोजित भाजपा की स्वाभिमान रैली में एक तीर से कई निशाने साधे... और मैडम सोनिया से पूछ ही डाला की भोपाल गैस त्रासदी में मारे गए हजारों लोगों की मौत का जिम्मेदार कौन है.... और किस तरह से इतनी मौत का दोषी वॉरेन एंडरसन को सरकारी दामाद बनाकर बचाया गया.... तो आखिर कौन हुआ मौत का सौदागर

भले ही नेता वोट के लिए आरोप प्रत्यारोप की राजनीति करे.... लेकिन एक बात तो साफ है कि चाहे वो गोधरा कांड हो.... या फिर भोपाल गैस त्रासदी.... दोनों ही जगह निर्दोष लोग ही काल के गाल में समाए.... और वे निर्दोष लोग ही सालों बाद भी मुंह बांए खड़े हैं कि हमारे अपनों की मौत का जिम्मेदार आखिर कौन है.... इस सवाल पर लाख दलीलों और गवाहों के बयान के बावजूद शायद हमारी न्याय व्यवस्था भी मौन है....

लेकिन एक बात तो साफ है कि जिस तरह से मौत का सौदागर शब्द भारत की राजनीति में चल पड़ा है.... अब ये शोध का विषय हो सकता है.... कि आखिर हमारे देश में कौन-कौन लोग ऐसे हैं जिन्हें इस उपाधी से नवाजा जा सकता है.... और जो वाकई में मौत के सौदागर हैं.... इस शब्द को भारतीय राजनीति में लाने का श्रेय भी कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी को जाता है.... कि उन्होंने इस शब्द का मतलब जाने बिना ही... एक चुनावी सभा में नरेंद्र मोदी को मौत का सौदागर कह डाला... या फिर उनका भाषण लिखने वाला वो शख्स जिसने बड़े ही उम्दा तरीके से सोनिया जी के भाषण में इस शब्द का प्रयोग किया... बहरहाल अक्सर यही होता है कि करता कोई है, नाम किसी और का होता है...