मंगलवार, 13 मार्च 2012

'शिव' का सफर

वो लड़ता था हक की लड़ाई... धार्मिक कार्यों से था जुड़ाव... कुछ कर गुजरने का था जुनून... वो है प्रदेश की राजनीति का महारथी... ये उस पांव-पांव वाले भैया की हकीकत है...जिसे लोग सीना चोड़ा करके सुनाते हैं... सीहोर जिले की बुधनी तहसील के छोटे से गांव जैत में 5 मार्च 1959 को जन्में शिवराज सिंह चौहान की कुछ कर जुगरने की चाहत घर से ही शुरू हो गई थी...उन्होंने छोटी उम्र में ही ऐसे फैसले लेने शुरू कर दिए थे...जो उनके घरवालों को भी परेशानी में डाल देते थे...उनके चाचा की मानें तो सबसे पहले उन्होंने गरीब मजदूरों के हक की आवाज बुलंद कर उनका बाजिव हक दिलाया... मुख्यमंत्री बचपन से गांव के मंदिर में भजन-कीर्तन और रामायण का पाठ किया करते थे...साथ ही चौपाल लगाकर लोगों की समस्या सुनने में उन्हें बेहद खुशी मिलती थी... छोटे से गांव से प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने तक के सफर में शिवराज सिंह चौहान ने अपने जीवन और राजनीति में कई उतार-चढ़ाव देखे...घर वालों के दबाव के बाद भी साल 1972 से ही वो संघ से जुड़ गए... और छात्र नेता से लेकर आपात काल के दौरान भूमिगत रहकर भी उन्होंने संघ के लिए काम किया... जिसके लिए उन्हें जेल भी जाना पड़ा... इसी उठापटक के बीच घरवालों की मर्जी के चलते वो साधना सिंह के साथ शादी के बंधन में बंध गए... शिवराज सिंह चौहान ने भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष का भी जिम्मा बसूबी निभाया... और 29 नवंबर 2005 को प्रदेश के 17 वें मुख्यमंत्री के तौर पर प्रदेश की बागडोर संभाली...इस दौरान उनके कई अनूठे रंग भी देखने को मिले...कभी वो तैरते नजर आए... तो कभी किसान बनकर खेती का जायजा लिया... इतना ही नहीं वो दो-दो चश्मा लगाते हुए भी दिखे... तो कभी मग्न होकर आरती गाते नजर आए... बहरहाल मध्यप्रदेश में गैर कांग्रेसी सरकार के पांच साल पूरे करने वाले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान शुरु से ही देशसेवा करना चाहते थे...छोटे से गांव में जन्में शिवराज ने गरीब-मजदूरों के हक की लड़ाई छोटी उम्र में ही शुरू कर दी थी...एमए फिलॉस्पी से गोल्ड मेडलिस्ट शिवराज ने कार्यकर्ता से लेकर मुख्यमंत्री बनने तक का सफर लोगों की सेवा करते ही तय किया...बहरहाल प्रदेश के मुखिया को उनके 53 वें जन्मदिन पर करोड़ों लोग ढेर सारी शुभकामनाएं दे रहे हैं...